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कैमूर की छाती पर वार! अल्ट्राटेक प्लांट से मझिगवां-बघवार में प्रदूषण और विनाश पर उबाल ब्लास्टिंग, धूल और जंगल उजड़ने से ग्रामीण दहशत में — प्रशासन की चुप्पी से भड़का आक्रोश

कैमूर की छाती पर वार! अल्ट्राटेक प्लांट से मझिगवां-बघवार में प्रदूषण और विनाश पर उबाल ब्लास्टिंग, धूल और जंगल उजड़ने से ग्रामीण दहशत में — प्रशासन की चुप्पी से भड़का आक्रोश सीधी जिले ...

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कैमूर की छाती पर वार! अल्ट्राटेक प्लांट से मझिगवां-बघवार में प्रदूषण और विनाश पर उबाल ब्लास्टिंग, धूल और जंगल उजड़ने से ग्रामीण दहशत में — प्रशासन की चुप्पी से भड़का आक्रोश

सीधी जिले के मझिगवां क्षेत्र के बघवार में संचालित UltraTech Cement प्लांट के खिलाफ अब ग्रामीणों का गुस्सा खुलकर सामने आने लगा है। क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि प्लांट द्वारा की जा रही अंधाधुंध ब्लास्टिंग और खनन ने ऐतिहासिक कैमूर पहाड़ियां को बर्बादी की कगार पर पहुंचा दिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि जो पहाड़ कभी इस क्षेत्र की पहचान और प्राकृतिक धरोहर थे, आज वे धीरे-धीरे मिटते जा रहे हैं। खनन और विस्फोट से न सिर्फ पहाड़ों का अस्तित्व खतरे में है, बल्कि पूरे इलाके का पर्यावरण भी गंभीर संकट में आ गया है।
सबसे बड़ी समस्या प्रदूषण को लेकर सामने आ रही है। सीमेंट प्लांट और एफआर यूनिट से उड़ने वाली धूल ने गांवों की हवा जहरीली बना दी है। लोगों को सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। वहीं लगातार हो रही ब्लास्टिंग से घरों में दरारें आने और हादसों का डर भी बना हुआ है।
पर्यावरणीय असंतुलन का असर अब वन्यजीवों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। जंगल और पहाड़ उजड़ने के कारण जंगली जानवर अब रिहायशी इलाकों में घुस रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में भय का माहौल है।
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार जिला प्रशासन को लिखित आवेदन देकर समस्या से अवगत कराया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे लोगों में भारी नाराजगी है।
इतना ही नहीं, स्थानीय लोगों ने कुछ ग्राम पंचायतों और प्लांट प्रबंधन के बीच मिलीभगत के भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि “मैनेजमेंट” के चलते उनकी आवाज दबाई जा रही है और समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही प्रशासन ने सख्त कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है। फिलहाल माइनिंग विभाग की टीम से जांच कराने का आश्वासन दिया गया है, लेकिन लोग अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीनी कार्रवाई चाहते हैं।

अगर समय रहते रोक नहीं लगी, तो कैमूर की विरासत और गांवों का भविष्य दोनों खतरे में पड़ सकते हैं…