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मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता के आगे झुकी व्यवस्था रोती रही आदिवासी बिटिया, मीडिया की आवाज़ बनी ताकत अनामिका बैगा के मेडिकल सपने को मिला संबल

मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता के आगे झुकी व्यवस्था रोती रही आदिवासी बिटिया, मीडिया की आवाज़ बनी ताकत  अनामिका बैगा के मेडिकल सपने को मिला संबल सीधी/विंध्य की आवाज। कुबेर तोमर सीधी जिले के अमिलिया ...

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मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता के आगे झुकी व्यवस्था रोती रही आदिवासी बिटिया, मीडिया की आवाज़ बनी ताकत  अनामिका बैगा के मेडिकल सपने को मिला संबल

सीधी/विंध्य की आवाज। कुबेर तोमर

सीधी जिले के अमिलिया क्षेत्र की रहने वाली आदिवासी बैगा समाज की होनहार छात्रा अनामिका बैगा जब पढ़ाई के लिए मदद मांगने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिलने पहुँचीं, तो सुरक्षा व्यवस्था की दीवार उसके सपनों के सामने खड़ी हो गई। मुख्यमंत्री से मिलने से रोकी गई अनामिका उस वक्त भावुक होकर चिल्ला-चिल्ला कर रोने लगी। यह दृश्य वहां मौजूद मीडिया कर्मियों ने कैमरे में कैद किया और खबर को प्रमुखता से उठाया।


जब मुख्यमंत्री का उड़न खटोला सीधी से भोपाल पहुंच और टीवी चैनलों पर प्रसारित हुई, तो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तत्काल इसका संज्ञान लिया। यहीं से एक आदिवासी बिटिया के संघर्ष ने उम्मीद की नई राह पकड़ ली।
मुख्यमंत्री की मानवीय पहल: सपनों को मिली उड़ान

सीधी प्रवास के दौरान बहरी में आयोजित कार्यक्रम में कुसमी विकासखंड के ग्राम देउमठ निवासी बिटिया अनामिका बैगा ने मुख्यमंत्री से मेडिकल की पढ़ाई में सहयोग का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने पूरी संवेदनशीलता के साथ उसकी बात सुनी और तत्काल हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया।
अनामिका वर्तमान में NEET परीक्षा की तैयारी कर रही है, जिसके लिए कोचिंग, छात्रावास और अध्ययन सामग्री की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बिना देरी के अनामिका को सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि भविष्य में मेडिकल कॉलेज में चयन होने पर राज्य सरकार उसकी पढ़ाई का पूरा खर्च उठाएगी।
प्रशासन हरकत में, कलेक्टर ने की मुलाकात
मुख्यमंत्री के निर्देशों के पालन में कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी ने अनामिका बैगा से मुलाकात की। उन्होंने जिला पंचायत सीईओ शैलेन्द्र सिंह सोलंकी को निर्देश दिए कि अनामिका को NEET की तैयारी हेतु आवश्यक पुस्तकें, कोचिंग और छात्रावास की व्यवस्था शीघ्र सुनिश्चित की जाए।
साथ ही अनामिका एवं उनके पिता रामकुमार बैगा से चर्चा कर उपखंड अधिकारी कुसमी और जनजातीय कार्य विभाग को निर्देशित किया गया कि पात्रता के अनुसार अनामिका को सभी शासकीय योजनाओं से जोड़ा जाए।
एक बिटिया, एक उम्मीद, एक संदेश
मुख्यमंत्री की इस मानवीय और प्रेरणादायक पहल से अनामिका बैगा बेहद प्रसन्न है। यह निर्णय केवल एक छात्रा की मदद नहीं, बल्कि वनांचल की हजारों बेटियों के लिए उम्मीद का संदेश है।
यह घटना साबित करती है कि
जब मीडिया सजग हो, प्रशासन संवेदनशील हो और नेतृत्व मानवीय हो —तो किसी भी आदिवासी बिटिया के सपने अधूरे नहीं रहते।