कोई हारा नहीं… सिर्फ और सिर्फ भाजपा जीती है ! — पांच राज्यों के नतीजों पर तीखी प्रतिक्रिया-उमेश तिवारी
सीधी/रीवा/ विंध्य की आवाज/ कुबेर तोमर

रीवा/सीधी/4 मई 26 -पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणामों पर टोंको-रोंको-ठोंको क्रांतिकारी मोर्चा के संयोजक उमेश तिवारी ने बेहद तीखी और बेबाक प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि इन चुनावों का सबसे बड़ा संदेश साफ है— यहां कोई हारा नहीं है, सिर्फ भाजपा जीती है!
उन्होंने कहा कि असली लोकतंत्र में जीत-हार तब होती है जब दो अलग-अलग विचारधाराएं आमने-सामने हों, जब जनता के सवालों पर टकराव हो। लेकिन इस चुनाव में ऐसा कुछ भी नहीं था। सभी राजनीतिक दल एक ही थाली के चट्टे-बट्टे साबित हुए—सबका मकसद सिर्फ सत्ता की मलाई खाना था।
तिवारी ने आरोप लगाया कि चुनाव की पूरी पटकथा “चुनाव से पहले झूठ, चुनाव के बाद लूट” के फार्मूले पर लिखी गई थी। भाजपा हो या विपक्ष—दोनों ने जनता को भ्रम में रखा, दोनों ने खुद को हितैषी बताया, लेकिन असल में दोनों एक ही दिशा में बढ़ रहे हैं— लोकतंत्र को लोकतांत्रिक तरीके से खत्म करने की दिशा में!
उन्होंने कहा कि जहां भाजपा हिंदू ध्रुवीकरण की राजनीति कर रही है, वहीं विपक्ष मुस्लिम तुष्टिकरण के खेल में लगा हुआ है। दोनों की राजनीति का चरित्र अलग नहीं, बल्कि एक ही सिक्के के दो पहलू जैसा है। ऐसे में सवाल उठता है—फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष में फर्क ही क्या बचा?
तिवारी ने विपक्ष पर सबसे तीखा हमला करते हुए कहा कि वह पूरी तरह से जनविरोधी साबित हुआ है।
न किसानों की लूट पर आवाज उठी,
न मजदूरों के अधिकारों की बात हुई,
न आदिवासियों के जल-जंगल-जमीन की रक्षा की चिंता दिखी,
न युवाओं के रोजगार पर कोई ठोस एजेंडा सामने आया।
उन्होंने कहा कि महंगाई, भ्रष्टाचार, सरकारी संपत्तियों की बिक्री, कमजोर होती संवैधानिक संस्थाएं, और विफल विदेश नीति जैसे गंभीर मुद्दे पूरी तरह गायब रहे।
तिवारी ने कहा कि अगर विपक्ष सच में जनपक्षीय होता, तो वह गांवों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, समान शिक्षा व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल, कुपोषण, महिलाओं के अवसर और गरीबों के सम्मानजनक जीवन जैसे मुद्दों को चुनाव का केंद्र बनाता—लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
चुनावी नतीजों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा ने बंगाल, असम और पुदुचेरी में अपना परचम लहराया है, जबकि तमिलनाडु और केरल में भले ही पूरी सफलता नहीं मिली, लेकिन संकेत साफ हैं—
“अभी तो यह ट्रेलर है, असली पिक्चर बाकी है!”
अंत में उन्होंने तंज कसते हुए कहा—
“कहाँ सयानी भाजपा और कहाँ दुधमुंहा विपक्ष!”
उन्होंने विपक्ष को “दोमुंहा, अवसरवादी और कबीलाई मानसिकता वाला” बताते हुए कहा कि उसकी हार से उन्हें खुशी है, भले ही वे भाजपा की जीत से सहमत न हों।






