10 वर्षों में 1.7 करोड़ युवा प्रभावित: भारत में पेपर लीक बना शिक्षा व्यवस्था पर सबसे बड़ा संकट-अभिषेक मिश्रा
पूर्व ABVP जिला संयोजक अभिषेक मिश्रा ने NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने पर उठाए सवाल, NTA की निष्पक्ष जांच और सुरक्षित परीक्षा प्रणाली की मांग

सीधी। भारत में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों को लेकर पूर्व जिला संयोजक, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद अभिषेक मिश्रा ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने एवं पेपर लीक विवाद को शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर बड़ा हमला बताते हुए NTA की परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।
अभिषेक मिश्रा ने कहा कि वर्ष 2014 से 2026 के बीच देशभर में लगभग 70 से 90 बड़े पेपर लीक मामले सामने आए, जिनसे करीब 1.7 करोड़ से अधिक छात्र एवं अभ्यर्थी प्रभावित हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि भर्ती एवं प्रवेश परीक्षाओं में लगातार हो रही गड़बड़ियों ने युवाओं का सिस्टम पर भरोसा कमजोर कर दिया है।
उन्होंने कहा कि NEET-UG 2024, AIPMT 2015, SSC CGL 2017, CBSE Paper Leak 2018, REET 2021, UGC-NET 2024, UP Police Constable Exam Leak 2024 और व्यापम घोटाला जैसे मामलों ने लाखों युवाओं की मेहनत और भविष्य को प्रभावित किया।
प्रमुख परीक्षाएं और प्रभावित छात्र
AIPMT पेपर लीक 2015 — 6.3 लाख छात्र
SSC CGL विवाद 2017 — 30 लाख छात्र
CBSE पेपर लीक 2018 — 28 लाख छात्र
REET भर्ती घोटाला 2021 — 16 लाख छात्र
NEET-UG विवाद 2024 — 24 लाख छात्र
UGC-NET परीक्षा रद्द 2024 — 9 लाख छात्र
UP Police Constable Exam Leak 2024 — 48 लाख छात्र
अभिषेक मिश्रा ने कहा कि पेपर लीक के कारण छात्रों और उनके परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ा है। आवेदन शुल्क, यात्रा, आवास, कोचिंग एवं पुनः परीक्षा खर्च मिलाकर प्रत्येक छात्र को हजारों से लाखों रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ा। विशेषज्ञों के अनुसार कुल आर्थिक नुकसान ₹8,500 करोड़ से ₹34,000 करोड़ तक पहुंच सकता है।
उन्होंने कहा कि यह केवल आर्थिक या प्रशासनिक संकट नहीं बल्कि गंभीर मानसिक स्वास्थ्य संकट भी बन चुका है। परीक्षा रद्द होने, भविष्य की अनिश्चितता और लगातार तनाव के कारण कई छात्र अवसाद एवं मानसिक दबाव का शिकार हुए हैं। देश के विभिन्न राज्यों में आत्महत्या जैसी दुखद घटनाएं भी सामने आई हैं।
अभिषेक मिश्रा ने केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है। जब तक परीक्षा प्रणाली पूरी तरह पारदर्शी नहीं होगी, तकनीकी सुरक्षा मजबूत नहीं होगी और दोषियों को त्वरित सजा नहीं मिलेगी, तब तक पेपर लीक पर प्रभावी रोक संभव नहीं है।
अंत में उन्होंने केंद्र सरकार एवं NTA से निष्पक्ष जांच, सुरक्षित परीक्षा प्रणाली और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि देशभर के छात्र केवल “मेहनत का न्याय और निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था” चाहते हैं।
विंध्य की आवाज सीधी कुबेर तोमर






