होम अपना प्रदेश नेशनल न्यूज फैशन क्राइम न्यूज बिजनेस लाइफ स्टाइल ऑटो
---विज्ञापन---

प्रताप गैस एजेंसी की भर्रेशाही उपभोक्ताओं पर पड़ रही भारी : उमेश तिवारी गैस एजेंसी संचालक पर आपराधिक प्रकरण दर्ज करने कलेक्टर को सौंपा शिकायत पत्र

प्रताप गैस एजेंसी की भर्रेशाही उपभोक्ताओं पर पड़ रही भारी : उमेश तिवारी गैस एजेंसी संचालक पर आपराधिक प्रकरण दर्ज करने कलेक्टर को सौंपा शिकायत पत्र सीधी शहर के अस्पताल चौक में संचालित ...

Published

प्रताप गैस एजेंसी की भर्रेशाही उपभोक्ताओं पर पड़ रही भारी : उमेश तिवारी गैस एजेंसी संचालक पर आपराधिक प्रकरण दर्ज करने कलेक्टर को सौंपा शिकायत पत्र

सीधी शहर के अस्पताल चौक में संचालित प्रताप गैस एजेंसी एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में आ गई है। टोंको-रोंको-ठोंको क्रांतिकारी मोर्चा के संयोजक उमेश तिवारी ने कलेक्टर सीधी को शिकायत पत्र सौंपते हुए एजेंसी संचालक पर आपराधिक प्रकरण दर्ज करने, एजेंसी का लाइसेंस निरस्त करने तथा पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराए जाने की मांग की है।


उमेश तिवारी ने आरोप लगाया कि गैस संकट को प्रताप गैस एजेंसी ने “आपदा में अवसर” में बदल दिया है और आम उपभोक्ताओं की मजबूरी को कमाई का जरिया बना लिया गया है। उन्होंने कहा कि गैस वितरण व्यवस्था में भारी अनियमितता, भ्रष्टाचार और कालाबाजारी चरम पर है। एजेंसी संचालक की कथित काली कमाई तो जांच के बाद सामने आएगी, लेकिन एजेंसी से जुड़े लग्गू-भग्गू करोड़ों के खेल में सक्रिय दिखाई दे रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि नियमों का पालन न होने के कारण उपभोक्ता भारी परेशानी झेल रहे हैं। शिकायतों के बावजूद दंडात्मक कार्रवाई नहीं होने से उपभोक्ताओं में मायूसी और नाराजगी बढ़ रही है, जबकि एजेंसी संचालक के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं।

शिकायत पत्र में दर्ज आरोपों के अनुसार गैस बुकिंग के बाद 48 से 72 घंटे के भीतर सिलेंडर की डिलीवरी होना अनिवार्य है, लेकिन उपभोक्ताओं को कई-कई दिनों और सप्ताह तक इंतजार कराया जाता है। इतना ही नहीं, जो उपभोक्ता स्वयं गोदाम से सिलेंडर प्राप्त करते हैं उनसे भी डिलीवरी शुल्क वसूला जा रहा है, जिसे शिकायतकर्ताओं ने खुली अवैध उगाही बताया है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि पिछले लगभग दो महीनों से KYC के नाम पर प्रति उपभोक्ता ₹240 तक की अवैध वसूली की जा रही है। हजारों उपभोक्ताओं से राशि लेने के बावजूद न कोई रसीद दी गई और न ही कोई वैधानिक जानकारी उपलब्ध कराई गई, जबकि KYC प्रक्रिया पूरी तरह निःशुल्क होती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में गैस वितरण को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि वास्तविक कनेक्शनधारियों को समय पर गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं कराया जाता, जबकि एजेंसी से जुड़े कथित दलालों और अवैध विक्रेताओं को बड़ी मात्रा में सिलेंडर उपलब्ध कराए जाते हैं। यही सिलेंडर गांवों में ₹2500 से ₹3000 तक में बेचे जा रहे हैं।

आरोप यह भी है कि नियम अनुसार OTP सत्यापन के बाद ही सिलेंडर वितरण होना चाहिए, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में एक ही व्यक्ति को 15 से 20 सिलेंडर तक दिए जाने की शिकायतें सामने आई हैं, जो कालाबाजारी और गंभीर अनियमितता की ओर इशारा करती हैं।
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना को लेकर भी शिकायत पत्र में कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। दावा किया गया है कि फर्जी नामों पर गैस कनेक्शन जारी किए गए हैं, जबकि पात्र महिलाओं को योजना का लाभ देने में टाल-मटोल किया जा रहा है। इतना ही नहीं, निःशुल्क मिलने वाले चूल्हा और सिलेंडर के नाम पर हितग्राहियों से ₹1500 से ₹2000 तक की कथित अवैध वसूली किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ताओं ने उज्ज्वला योजना के सभी हितग्राहियों की सूची और वितरण विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है।
गैस वितरण के सुरक्षा नियमों को लेकर भी एजेंसी कटघरे में है। आरोप है कि डिलीवरीमैन के पास वजन मापने की मशीन नहीं रहती और उपभोक्ताओं को सिलेंडर का वजन तौलकर नहीं दिखाया जाता। गैस लीकेज की शिकायत पर तत्काल निरीक्षण और निःशुल्क मरम्मत सुविधा उपलब्ध कराना नियम है, लेकिन उपभोक्ताओं को यह सुविधा नहीं मिल रही।

शिकायत पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि सुरक्षा मानकों के अनुसार हर 2 से 5 वर्ष में एजेंसी के मैकेनिक द्वारा उपभोक्ताओं के घर जाकर चूल्हा, पाइप और रेगुलेटर की सुरक्षा जांच की जानी चाहिए, लेकिन वर्षों से ऐसी कोई जांच नहीं हुई। यदि जांच की गई है तो संबंधित उपभोक्ताओं की सूची सार्वजनिक करने की मांग भी उठाई गई है।

सबसे गंभीर आरोप एजेंसी के गोदाम में छोटे सिलेंडरों से बड़े सिलेंडरों में गैस रिफिलिंग को लेकर वायरल वीडियो पर लगाया गया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि सुरक्षा नियमों को दरकिनार कर यह खतरनाक काम किया जा रहा है, जो किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा है। वीडियो प्रमाण के साथ शिकायत किए जाने के बावजूद अब तक कोई वैधानिक कार्रवाई नहीं होना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।
टोंको-रोंको-ठोंको क्रांतिकारी मोर्चा ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो उपभोक्ताओं के साथ सड़क पर उतरकर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस पूरे मामले में क्या रुख अपनाता है और कथित गैस माफिया पर कब तक शिकंजा कसता है।

विंध्य की आवाज कुबेर तोमर