चुरहट कॉलेज में छात्रों का विस्फोटक प्रदर्शन: बदहाल शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ NSUI का हल्लाबोल, पुतला दहन कर प्रशासन को दी आर-पार की चेतावनी
सीधी | कुबेर तोमर
विंध्य की आवाज चुरहट सीधी / शासकीय महाविद्यालय चुरहट में व्याप्त अव्यवस्थाओं, छात्रों की लगातार हो रही उपेक्षा और बदहाल शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ गुरुवार को छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। वर्षों से समस्याओं के बोझ तले दबे छात्र-छात्राओं ने एनएसयूआई (NSUI) के नेतृत्व में जोरदार प्रदर्शन करते हुए महाविद्यालय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उग्र विरोध के बीच छात्रों ने नारेबाजी कर प्रशासन को घेरा और प्रतीकात्मक विरोध स्वरूप ECI का पुतला दहन कर अपना आक्रोश व्यक्त किया।
प्रदर्शन का नेतृत्व एनएसयूआई चुरहट अध्यक्ष आयुष सिंह बघेल ने किया। छात्रों का आरोप है कि महाविद्यालय अब शिक्षा का केंद्र कम और अव्यवस्थाओं का अड्डा ज्यादा बन चुका है, जहां छात्र सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं और जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं।
छात्राओं की सुरक्षा पर मंडरा रहा खतरा
ज्ञापन में सबसे गंभीर मुद्दा कॉलेज पहुंच मार्ग पर शराब और अन्य नशीले पदार्थों की खाली बोतलों का बिखरा होना बताया गया। छात्रों ने आरोप लगाया कि जब कॉलेज जाने का रास्ता ही असामाजिक गतिविधियों का गवाह बन जाए, तो छात्राओं की सुरक्षा और अभिभावकों की चिंता स्वाभाविक है। सवाल यह है कि आखिर जिम्मेदार विभाग इस स्थिति पर कब जागेगा?
पढ़ाई चौपट, सुविधाएं गायब, छात्र परेशान
एनएसयूआई ने आरोप लगाया कि कॉलेज में नियमित कक्षाओं का संचालन भगवान भरोसे है। परिवहन सुविधा नहीं होने से दूरदराज़ के छात्र परेशान हैं। परिसर में गंदगी का अंबार लगा है, शुद्ध पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं है, विज्ञान संकाय के छात्रों के लिए पर्याप्त लैब नहीं हैं और खेल मैदान व खेल संसाधनों की स्थिति भी दयनीय है।
छात्र नेताओं का कहना है कि शासन करोड़ों रुपये शिक्षा सुधार के नाम पर खर्च करने का दावा करता है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि चुरहट कॉलेज के छात्र आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
“छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बंद करो”
प्रदर्शन के दौरान एनएसयूआई जिला अध्यक्ष सौरभ सिंह ने प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि छात्रों के भविष्य के साथ हो रहा खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय में शिक्षा, सुरक्षा और आधारभूत सुविधाएं सुनिश्चित करना प्रशासन की पहली जिम्मेदारी है, लेकिन यहां समस्याओं के समाधान की बजाय लगातार अनदेखी की जा रही है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को जिलेभर में व्यापक रूप दिया जाएगा।
प्रशासन को खुली चेतावनी
प्रदर्शन के दौरान छात्रों और कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी करते हुए कहा कि यदि निर्धारित समय में समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो बड़ा छात्र आंदोलन खड़ा किया जाएगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि आने वाले समय में किसी भी प्रकार की स्थिति के लिए महाविद्यालय प्रशासन स्वयं जिम्मेदार होगा।
सैकड़ों छात्र हुए शामिल
प्रदर्शन में युवा कांग्रेस के पूर्व प्रदेश सचिव कमलेंद्र सिंह, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष विजय सिंह, विधानसभा अध्यक्ष केडी सिंह, अंश सिंह, रेहान मंसूरी, रोशन सिंह, विकास सिंह, शिवम पाठक, अमर सोनी, महर्षि सिंह सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
आखिर कब टूटेगी प्रशासन की चुप्पी?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब एक महाविद्यालय के छात्र सड़क पर उतरकर सुरक्षा, स्वच्छता, पेयजल, परिवहन और पढ़ाई जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग करने को मजबूर हों, तो शिक्षा व्यवस्था के बड़े-बड़े दावों का क्या अर्थ रह जाता है? चुरहट कॉलेज में उठी यह आवाज सिर्फ एक संस्थान की नहीं, बल्कि उस व्यवस्था के खिलाफ है जो छात्रों की समस्याओं को सुनने के बजाय फाइलों में दबाने की आदी हो चुकी है।
अब निगाहें प्रशासन पर हैं—क्या समस्याओं का समाधान होगा या फिर छात्रों का यह आक्रोश आने वाले दिनों में और बड़े आंदोलन की चिंगारी बनेगा?





