हाईकोर्ट से काजल वर्मा को बड़ी राहत नगर पालिका अध्यक्ष के वित्तीय अधिकार बहाल, महीनों से अटके भुगतान का रास्ता साफ
सीधी/विंध्य की आवाज/कुबेर तोमर
सीधी। नगर पालिका परिषद सीधी की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में शुक्रवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला, जब हाईकोर्ट ने नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती काजल वर्मा के वित्तीय अधिकारों पर लगी रोक को हटाते हुए पूर्व स्थिति बहाल कर दी। न्यायालय के इस फैसले के बाद नगर पालिका में लंबे समय से रुके भुगतान और वित्तीय कार्यों के दोबारा शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है।
जानकारी के अनुसार नगर पालिका परिषद सीधी के स्थाई कर्मचारी बृजेश सिंह गोरे द्वारा हाईकोर्ट में डब्ल्यूपी क्रमांक 11116/2026 प्रस्तुत की गई थी। आरोप है कि याचिका में तथ्यों को छिपाकर पेश किया गया, जिसके आधार पर न्यायालय ने 6 अप्रैल 2026 को अंतरिम आदेश जारी करते हुए नगर पालिका अध्यक्ष के वित्तीय अधिकारों पर रोक लगा दी थी।
“तथ्यों को छिपाकर ली गई थी रोक” — काजल वर्मा
नगर पालिका अध्यक्ष काजल वर्मा ने कहा कि उनके पक्ष द्वारा हाईकोर्ट के समक्ष पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की गई। साथ ही 6 अप्रैल के आदेश को वापस लेने के लिए आवेदन भी प्रस्तुत किया गया। शुक्रवार 22 मई 2026 को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पूर्व में पारित आदेश को वेकेट (निरस्त) कर दिया।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद 6 अप्रैल से लागू वित्तीय रोक स्वतः समाप्त हो गई है। न्यायालय ने मामले की अंतिम सुनवाई आगे नियत करने के निर्देश भी दिए हैं।
स्थाई कर्मचारी पर अनुशासनहीनता का आरोप
नपाध्यक्ष काजल वर्मा ने स्थाई कर्मचारी बृजेश सिंह गोरे पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें इस प्रकार की याचिका दायर करने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारी ने अपने पदीय दायित्वों के विपरीत कार्य करते हुए घोर अनुशासनहीनता की है, जिसके संबंध में आगे समुचित कार्रवाई की जाएगी।
महीनों से अटके थे भुगतान
नगर पालिका परिषद सीधी में इस विवाद के चलते कई महीनों से वित्तीय स्वीकृतियों में भारी दिक्कतें आ रही थीं। नगर पालिका के कई भुगतान इसलिए लंबित पड़े थे क्योंकि चेक जारी करने में अध्यक्ष और सीएमओ दोनों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं। अध्यक्ष के वित्तीय अधिकारों पर रोक लगने के कारण विकास कार्यों और भुगतान प्रक्रिया पर असर पड़ा था।
अब हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद नगर पालिका का वित्तीय और प्रशासनिक कामकाज दोबारा सामान्य होने की उम्मीद जताई जा रही है। नगर पालिका के ठेकेदारों, कर्मचारियों और हितग्राहियों को भी इस फैसले से राहत मिलने की संभावना है।






